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जीवन का संस्कार

भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए

भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए जनसाधारण को कर्तव्य पारायण होना चाहिए। ये न कोई कोर्स है, न किताबी ज्ञान — ये जीवन का संस्कार है।

कर्तव्य पहले, अधिकार बाद में

5 संस्कार

हर नागरिक के जीवन के 5 स्तंभ

ये सिद्धांत किताब से नहीं, संस्कार से आते हैं — और संस्कार घर से शुरू होता है।

1

स्वाभिमान

Self Respect

अपनी मिट्टी, अपनी भाषा, अपनी परंपरा पर गर्व।

"मैं हिंदुस्तानी हूं" ये बोलते समय सीना चौड़ा हो।

विदेशी की नकल नहीं, अपनी पहचान से दुनिया को लीड करना।

2

स्वावलंबन

Self Reliance

"मेरा काम मैं खुद करूंगा" वाला भाव।

गांव का युवा खेती भी करे, कोडिंग भी सीखे। हर घर में एक उद्यमी, हर हाथ में हुनर।

PM मोदी का "आत्मनिर्भर भारत" यही है।

3

सेवा भाव

Service Spirit

"मेरे बाद देश" वाला जज्बा।

राष्ट्रपति मुर्मू जी की तरह सादगी + सेवा।

चाहे सफाई कर्मी हो या वैज्ञानिक — सब राष्ट्र सेवा कर रहे हैं ये भाव।

4

चरित्र

Character

सच बोलो, समय की कदर करो, वादा निभाओ।

राष्ट्रपति मुर्मू जी ने दिव्यांग बच्चों के गाने पर आंसू रोक नहीं पाए — वो चरित्र है।

डिग्री से बड़ा चरित्र होता है।

5

कर्तव्यबोध

Duty First

अधिकार बाद में, कर्तव्य पहले।

सैनिक सीमा पर, किसान खेत में, छात्र क्लास में — सब अपना कर्तव्य निभाएं।

तभी भारत विश्वगुरु बनेगा।

कैसे शुरू करें

संस्कार देने की विधि

3 छोटे कदम — घर से शुरू होकर रोज़ के जीवन तक।

1

घर से शुरू

माता-पिता बच्चों को सुबह "भारत माता की जय" सिखाएं।

2

स्कूल में

रोज़ 10 मिनट "देशभक्ति + श्रम की महिमा" की बात।

3

योगी अखाड़ा वेबसाइट पर डेली जाइए

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भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए

स्वाभिमान, स्वावलंबन, सेवा भाव, चरित्र और कर्तव्यबोध — यही 5 संस्कार हर घर, हर स्कूल और हर मन तक पहुंचाने हैं। आज से शुरुआत करें।

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